भारतीय समाज में पुरुषों को “मजबूत” माना जाता है, जिसके कारण वे अपनी भावनाओं को दबाते हैं और अवसाद, चिंता और अकेलेपन जैसी समस्याओं का सामना करते हैं।

सामाजिक और सांस्कृतिक की चुनौतियों को पूरा करने के दबाव के कारण कई पुरुष मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं, लेकिन उनकी प्रतिबद्धताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाता है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड रिपोर्ट माने तो 72.5 परसेंट लोगों ने सुसाइड कमिट किया है जो की एक बहुत ही गंभीर समस्या है।

काउंसलिंग या थेरेपी को पुरुषों के लिए "कमजोरी" समझा जाता है, जिससे वे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मदद लेने में हिचकिचाते हैं।

पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर बात करें, उन्हें सुनें, समझें और मदद करें! 💙

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